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06 November 2009

सागर के मेडिकल कालेज का नाम बुन्देलखण्ड मेडिकल कालेज होगा

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सागर में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का लोकार्पण करने के बाद सभा को संबोधित करते हुये घोषणा की कि इस शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का नाम बुन्देलखण्ड शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय होगा।
इस चिकित्सा महाविद्यालय का लोकार्पण आज किया गया है, इसलिये आगामी वर्ष से प्रत्येक वर्ष 5 नवम्बर को ऐच्छिक अवकाश घोषित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने सागर स्थित खेल परिसर में करीब 94 लाख रूपये की लागत के स्वीमिंग पुल के निर्माण के लिये शिलान्यास किया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इस चिकित्सा महाविद्यालय के प्रारंभ होने से आज प्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल के लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार हुआ है। यह चिकित्सा महाविद्यालय देश में अद्वितीय होगा और इस में भविष्य में विभिन्न चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाई जायेगी।
श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश शासन किसानों के हितों के प्रति सदैव प्रयासरत रहेगी और केन्द्र सरकार द्वारा गेहूं का जो भी समर्थन मूल्य घोषित किया जायेगा प्रदेश सरकार द्वारा उसके अलावा प्रति क्विंटल गेहूं पर 100 रूपये की प्रोत्साहन राशि किसानों को दी जायेगी।
प्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल में किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से विभिन्न सिंचाई योजनाओं के लिये धन की कमी नहीं होने दी जायेगी। सागर संभाग की विभिन्न सिंचाई योजनाओं को प्रारंभ कराया जायेगा जिससे किसान समृद्ध हो सकेंगे। बुन्देलखण्ड अंचल में उद्योग इकाईयों की स्थापना के समुचित प्रयास किये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज प्रदेश के विकास के लिये सरकार के साथ सहयोग करे तभी सच्चे अर्थों में प्रदेश की प्रगति होगी। उन्होंने समाज के सभी वर्गो के लोगों से अपने-अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन करने का आव्हान किया।
पानी की बचत करने और वाटर हारर्वेस्टिंग करने को जरूरी बताते हुए श्री चौहान ने लोगों से बिजली की बचत करने के लिये सी.एफ.एल. का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने प्रदेश के सर्वागीण विकास के लिये लोगों से अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिये संकल्प लेने का आव्हान किया।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने उपस्थित जन समुदाय से मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी प्रदेश बनाने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि मुख्य मंत्री श्री चौहान प्रदेश के आम आदमी के सपनों को साकार करने में जुटे हुए हैं। अगले चार वर्षो में करीब साढ़े चार सौ करोड़ रूपये की राशि इस मेडिकल कालेज के विकास कार्यों पर व्यय की जायेगी। साथ ही क्रीटिकल केयर सेन्टर भी स्थापित किया जायेगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि इस मेडिकल कालेज के चिकित्सालय के प्रारंभ हो जाने पर न केवल सागर राजस्व संभाग के सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों के लोगों को चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी बल्कि संभाग के पड़ोसी जिलों के लोगों को भी चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वर्ष 2006 में सागर प्रथम आगमन के अवसर पर मेडिकल कालेज खोले जाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के एक सप्ताह के भीतर ही मंत्रिपरिषद ने इस घोषणा के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूर भी किया।
प्रारंभ में संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. बी.के.सैनी ने कहा कि इस मेडिकल कालेज में 750 बिस्तरों की क्षमता के चिकित्सालय का निर्माण कराया जायेगा। इस मेडिकल कालेज सहित प्रदेश के कुल 6 मेडिकल कालेजों में अब प्रति वर्ष 720 छात्र प्रवेश ले सकेंगे ।
समारोह में जल संसाधन मंत्री श्री जयंत मलैया, आदिम जाति कल्याण राज्य मंत्री श्री हरिशंकर खटीक, सांसद श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर, श्री शिवराज लोधी और श्री जितेन्द्र सिंह बुन्देला, विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, श्री प्रदीप लारिया, श्री भानू राणा, श्रीमती विनोद पंथी, श्री गोविंद सिंह राजपूत, श्री अरूणोदय चौबे, श्री हरिसिंह सप्रे, श्रीमती आशारानी, श्री रामदयाल अहिरवार, जिला पंचायत सागर के अध्यक्ष श्री हरवंश सिंह राठौर और उपाध्यक्ष श्रीमती सरोज सिंह, बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष द्वय श्री डालचंद पटेल और श्री अशोक चौरसिया, नगरपालिक निगम सागर के अध्यक्ष श्री प्रदीप पाठक, मार्कफेड के उपाध्यक्ष श्री वीरेन्द्र पाठक, पूर्व मंत्री सर्वश्री नारायणप्रसाद कबीरपंथी, डॉ. परसराम साहू और श्री लक्ष्मीनारायण यादव, पूर्व विधायक सर्वश्री धरमू राय, श्रीमती सुशीला सिरोठिया, श्रीमती सोनाबाई और श्रीमती सुधा जैन सहित अन्य जन प्रतिनिधि और विशाल संख्या में नागरिक और ग्रामवासी उपस्थित थे।

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05 November 2009

प्रदेश का 11वां चिकित्सा महाविद्यालय सागर में

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा आज लोकार्पण
Bhopal:Wednesday, November 4, 2009:Updated 16:08IST चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में शासन का महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, प्रदेश का सागर में 11वां चिकित्सा महाविद्यालय। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आज सागर में इस महाविद्यालय का लोकार्पण करेंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा दो वर्ष पूर्व इस महाविद्यालय की आधारशिला रखी गई थी।
राज्य शासन द्वारा 1.45 अरब रुपये की लागत से निर्मित किए जाने वाले इस महाविद्यालय की प्रवेश क्षमता 150 विद्यार्थी प्रतिवर्ष होगी। 750 बिस्तरों के सर्वसुविधायुक्त चिकित्सालय का भी निर्माण होगा। चिकित्सा महाविद्यालय को डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से सम्बद्ध किया गया है। इस महाविद्यालय का शैक्षणिक कार्य 26 अक्टूबर, 2009 से शुरू हो चुका है।
प्रदेश में वर्तमान में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर व रीवा में एक-एक शासकीय महाविद्यालय है, निजी क्षेत्र के भोपाल व इंदौर में दो-दो तथा उज्जैन में एक चिकित्सा महाविद्यालय है।

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28 October 2009

मुख्यमंत्री द्वारा हीरा सेम्पल प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बक्सवाहा (छतरपुर) में रियो टिन्टो के बन्दर परियोजना स्थल पर 33 करोड़ रूपये लागत के हीरा सेम्पल प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उदघाटन के बाद प्लांट का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि इस क्षेत्र में उच्च कोटि का हीरा मिलने की संभावना है। इससे क्षेत्र का चौमुखी विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा इस क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि आने के साथ लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नगर पंचायत भवन बनाने और क्षेत्र के विकास के लिये प्रारंभिक रूप में 50 लाख रूपये देने की घोषणा की। समारोह में छतरपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री गोपाल भार्गव, वन राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला, सांसद, विधायकगण, जन प्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
मध्यप्रदेश अब विश्व के दस शीर्ष हीरा उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हो जायेगा। प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थित 'बन्दर परियोजना' में आठ लेम्प्रॉइट्स (इस प्रकार की किम्बरलाईट चट्टान) का एक समूह सम्मलित है और यह रियो टिन्टो की सबसे अग्रणी हीरा परियोजना है। सेम्पल प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन बन्दर के हीरा भण्डार की कीमत एवं ग्रेड का आंकलन करने में सहायक होगा।
रियो टिन्टो डायमण्ड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री ब्रूस कॉक्स ने बन्दर परियोजना में सहयोग के लिए प्रदेश सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि बन्दर परियोजना अंतर्राष्ट्रीय हीरा उद्योग के लिए एक उत्साहपूर्वक परिणाम है और भारत में एक विश्वस्तरीय हीरा खान के विकास के लिए अगला चरण है।
बन्दर परियोजना निदेशक सुश्री स्टेफनी लोडर ने बताया कि बन्दर में स्थित सेम्पल प्रोसेसिंग प्लांट एक अत्याधुनिक प्लांट है जिसकी लागत 33 करोड़ है जो 10 टन प्रतिघंटा की दर से सेम्पल प्रसंस्करण करने में सक्षम है।
संयंत्र पूर्ण रूप से मौड्यूलर है और इसके लिए किसी प्रकार की स्थायी संरचना की आवश्यकता नहीं होती है। यह स्वचलित है और पर्यावरण पर प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए विशेष रूप से डिजाईन किया गया है। धूल एवं ध्वनि नियंत्रण के अलावा यह संयंत्र किसी भी प्रकार के रसायन प्रयोग नहीं करता है। जल पुर्नचक्रमण (रिसाईक्लिंग) एवं जल संचय (हारवेस्टिंग) के द्वारा पानी का प्रयोग भी कम करता है।
वर्तमान में बन्दर परियोजना लगभग 220 व्यक्तियों को रोजगार मुहैया करा रही है जिसमें से 93 प्रतिशत मध्य प्रदेश से है। स्थानीय समुदाय रोजगार बारी के आधार (रोटेशन) पर दिया जाता है और वर्तमान में लगभग 170 परिवार, परियोजना के रोजगार अवसरों से लाभान्वित हो रहे हैं। भविष्य में हीरा खान से लगभग 400 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार और खान के संचालन के लिए आवश्यक वस्तुएं एवं सेवाएं प्रदान करने के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार की आशा है।
मध्य प्रदेश में रियो टिन्टो द्वारा हीरा की वास्तविक खोज 2004 में एक क्षेत्रीय अन्वेषण कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में हुई थी। बन्दर परियोजना के 'ऑर्डर ऑफ मैग्नीट्यूड स्टडी' (परिणाम अध्ययन) ने मार्च 2009 में 0.7 कैरेट प्रति टन के ग्रेड पर 37 मिलियन टन 'सांकेतिक संसाधन' (इन्फर्ड रिसोर्स) इंगित किया है।
इस खोज के परिणाम स्वरूप रियो टिन्टो ने पन्ना हीरा खान से सात गुना अधिक मूल्यवान हीरा संसाधन की खोज की है जिसकी संभावित उत्पादकता पन्ना से 20 गुना अधिक होगी। इस प्रकार से मध्य प्रदेश परिणाम एवं गुणवत्ता के आधार पर विश्व के 10 शीर्ष हीरा उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हो जायेगा।
नये सेम्पल प्रोसेसिंग प्लांट से प्रारम्भिक परिणाम वर्ष 2009 के अन्त तक प्राप्त होने की संभावना है। बन्दर परियोजना के मूल्यांकन के अगले चरण में अभियान्त्रिकी अध्ययन एवं प्रस्तावित हीरा खान के सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभावों का आंकलन सम्मिलित होंगे। इन अध्ययनों के पूर्ण होने में दो से तीन वर्षों का समय लगेगा। रियो टिन्टो के आंकलन के अनुसार बन्दर परियोजना में एक खान विकसित करने के लिए न्यूनतम 2200 करोड़ रूपये के निवेश की आवश्यकता होगी।

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